स्टॉक ट्रैडिंग में कैसे पाएं तगड़ा रिटर्न

How to get higher returns from stock trading

आपने कितनी बार किसी की सलाह पर क्विक बक (profits) के लिए स्टॉक क्रय किया है, और महीनों तक इंतजार किया, शायद सालों तक आप अपनी कॉस्ट को रिकवर करने के लिए ही जूझते रहे हों. Share trading experts की मानें तो ये एक रिस्की गैम है. लेकिन यदि इसे स्मार्टली किया जाए तो आप क्विक बक हासिल कर सकते हैं.

एक मान्य एक्सपर्ट के मुताबिक ट्रेडिंग का मुख्य आकर्षण इसलिए भी है क्योंकि लोगों का मानना है कि ट्रेडिंग से जल्द मुनाफा होता है. लेकिन ये इतना भी आसान नहीं क्योंकि ट्रेडिंग के लिए सख्त अनुशासन की जरूरत होती है.

क्या आप गोल्ड और सिल्वर की करेंट हाई प्राइज़ेस पर इन्वेस्ट करेंगे?

काफी रुपया गंवाने पर भी कई ट्रेडर्स ऐसा अपनी रिस्क पर करते हैं, लेकिन ये तब ठीक होगा जब आपकी फाईनेंसियल पोजिशन बेहतर हो और आप छोटी-मोटी रिस्क को कवर कर सकते हों. जब आप ट्रेडिंग की बेहतर रणनीति बना लेते हैं तो आप बेहतर तरीके से जाने हैं कि आपकी प्रतिबद्धता और हानि की संभावना क्या है?

ट्रेडर्स के प्रकार- आप शेयर्स और कमोडिटीज़ में ट्रेडिंग कर सकते हैं. भारत में रीटेल इन्वेस्टर्स मुख्य तौर पर स्टॉक फ्यूचर्स में ट्रेडिंग करते हैं. ट्रेडिंग का मतलब किसी स्टॉक को सेम डे खरीदना और बेचना या फिर दो से तीन दिनों के लिए होल्ड पर रखना होता है. फॉर्मर तौर पर इसे इंट्रा-डे ट्रेड कहा जाता है बाद में ये स्विंग ट्रेड कहलाता है. पोजीशनल ट्रेड सामान्य तौर पर लॉन्गर पोजीशन लेता है और स्टॉक को 2 से तीन दिन इसमें रखा जा सकता है.

मेकिंग मनी

इसमें प्रॉफिट का खेल रिस्क मैनेजमेंट पर टिका होता है. कई वरिष्ठ एक्सपर्ट्स की भी यही राय है कि जो ट्रेडर्स सही तरीके से रिस्क मैनेजमेंट करते हैं वो लंबे समय से प्रॉफिट अर्न कर रहे हैं.

मार्केट की अस्थिरता के दौरान टिप्स

एक्सपर्ट्स के मुताबिक मार्केट के अस्थिर होने की स्थिति में व्यापक कारकों पर ध्यान रखना अहम होता है. जैसे कितना कैपिटल बाकी है, आप कितनी संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं औरटेक्निकल एनालिसिस के बारे में आपका व्यवहारिक ज्ञान कितना है? यह सभी मार्केट की अस्थिरता के दौरान काम आता है. जोखिम उठाने का माद्दा, इन्वेस्ट के लिए उपलब्ध मनी, और कितने ट्रेड लाभदायी हो सकते हैं यह भी ध्यान रखने वाला कारक है.

  1. स्किल सेट्स- किसी तरह की हॉट टिप मिलने पर भी आप तभी प्रॉफिट अर्न कर सकते हैं जब आप मार्केट का रुख परखने और टेक्निकल विश्लेषण करने में सिद्धहस्त हों. क्योंकि टेक्निकल विश्लेषण के दौरान मार्केट से जुड़े हिस्टोरिकल डाटा का परीक्षण करना काफी कठिन काम भी है. इंटरनेट पर टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए सॉफ्टवेयर मौजूद हैं, लेकिन लिमिटेड फीचर्स के कारण ये लिमिटेड रिज़ल्ट ही दे पाते हैं. जबकि प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर से संभावित ट्रेडिंग के बारे में विस्तृत नतीजे मिलते हैं. एक्सपर्ट्स की राय है कि यदि आपके पास मार्केट की परख करने और डाटा विश्लेषण की काबलियल हो तो ही स्वयं के बूते ट्रेडिंग करें नहीं तो ब्रोकरेज फर्म के रिलेशनशिप मैनेजर की मदद लेना ज्यादा फायदेमंद रहेगा. आपको बता दें कुछ स्टॉक एक्सचैंज जेसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचैंज और नैशनल स्टॉक एक्सचैंज टेक्निकल एनालिसिस संबंधी कोर्स संचालित करते हैं. ऑन लाईन ट्रेडिंग एकैडमी भी इस तरह के कोर्स ऑफर कर रही है. प्रचलित युक्ति की यदि बात करें तो, तभी ट्रेड करना चाहिए जब आप रिस्क उठा सकते हों, इमोशंस पर नियंत्रण हो, टारगेट सेट हो और टारगेट पॉइंट पर लाभ/हानि तय की गई हो.
  2. ट्रेडिंग टिप्स- कोई भी ट्रेडिंग टिप तभी कारगर है जब उसे सही तरीके से लागू किया जाए. एक्सपर्ट्स का कहना है ट्रेडिंग भावनाओं का युद्ध है, ट्रेडिंग सिंपल है लेकिन आसान नहीं, आपको सख्त अनुशासित होना होगा. कई ऐसे केस सामने आए हैं जिसमें इन्वस्टर्स ने ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में इंतजार करते हुए मौजूदा लाभ गवां दिया.
  3. डिसिपिलिन- सफलता का सूत्र है स्टॉप-लॉस ऑर्डर. स्टॉक की सेलिंग के दौरान कीमतों में फिसलन होने पर ये मदद करता है. उदाहरण के तौर पर आपने 100 रुपए के दाम पर कंपनी के शेयर खरीदे और उसका स्टॉप लॉस 95 रुपये नियत किया. ऐसे में जब कीमत कम होकर 95 रुपये पहुंचेगी शेयर ऑटोमेटिकली बेच दिया जाएगा. इसका मतलब आपने अपने लॉस को 5 रुपए पर सीमित कर दिया. जब आप ट्रेड में एंटर करने वाले हों आपको इस बारे में स्मरण कर लेना चाहिए कि आप कितना नुकसान उठाने के लिए तैयार हैं.
  4. स्किल- ट्रेडिंग शास्त्र के मुताबिक ट्रेडिंग एक तरह की स्किल (कौशल) है. जिसमें आपको क्या करना के साथ ही क्या नहीं करना है इस बात का निर्णय लेने में महारत होनी जरूरी है. साथ ही आपको अमैच्योर्स को भांपने और जाल में बींधने के साथ ही पोजिशन्स बनाने में भी दक्ष होना जरूरी है. आपको जल्द एंट्री करने और बाहर जाने में भी प्रवीण होना जरूरी है. देखने में आया है कि कई बार अकुशल ट्रेडर्स मार्केट में गलत पॉइंट पर खरीदी करते हैं.
    प्लानिंग- कुछ स्टॉक्स की पहचान करें और उस पर फोकस करें.
  5. मिनिमम कैपिटल- कम से कम 2 लाख कैपिटल वाले ट्रेड में ही सारवान लाभ मिलता है. ये कैपिटल आपकी कोर सेविंग्स का हिस्सा नहीं होने चाहिए और न ही इसको उधार लिया जाना चाहिए. कुछ लोग इससे कम पर ट्रेड करते हैं, लेकिन इसमें वाल्यूम्स अति महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स मिनिमम कैपिटल की जरूरत पर हमेशा से ही बल देते आए हैं.
    स्टॉक वाल्यूम्स- किसी स्टॉक के ट्रेडेबल होने के लिए पर्याप्त वाल्यूम्स का होना जरूरी है. निफ्टी-50 स्टॉक्स में ट्रेडिंग की शुरुआत करने वालों के लिए एक्सपर्ट्स कम से कम पांच लाख शेयर्स डेली एवरेज वॉल्यूम की सलाह देते हैं.
  6. प्राईज़ रैंज- आप क्या करेंगे जब शेयर के वॉल्यूम्स तो अधिक हैं लेकिन कीमत में ज्यादा प्रवाह नहींहो?ऐसे में आपको मिनिमम प्राईज़ रैंज के 10 रुपये कीमत वाले शेयर्स को प्राथमिकता देना चाहिए. इसका मतलब यह हुआ कि किसी स्टॉक का इंट्रा-डे हाई और इंट्रा-डे लो का एवरेज डिफरेंस कम से कम 10 रुपए होना चाहिए.
  7. टाईमिंग्स- सलाह दी जाती है कि मार्केट के अस्थिर सत्र पर खास तौर पर नज़र रखना चाहिए. एक्सपर्ट्स की मानें तो भारतीय मार्केट्स में सुबह 9.30 से11.30 के दौरान ट्रेडिंग करना लाभदायी होता है.
    अस्थिरता- पॉज़िटिव बेटा कावन स्टॉक अथवा उससे अधिक बेहतर रहता है. ये स्टॉक मार्केट के साथ धाराप्रवाहिता करता है. यदि मार्केट में 2 फीसदी गिरावट होती है तो स्टॉक में भी 2 फीसदी की गिरावट होती है. कुछ लोग टू बेटा या टू पॉइंट फाईव को भी फॉलो करते हैं. लेकिन सलाह दी जाती है कि इससे आगे बढ़ने के पहले दस बार निर्णय करें.
  8. सप्लाई डिमांड- इंडिविजुअल स्टॉक्स की सप्लाई और डिमांड को भी समझना जरूरी है. यदि विक्रय के लिए शेयर्स की संख्या बढ़ती है तो स्टॉक नहीं खरीदना चाहिए. विपरीत परिस्थिति में इसके उलट निर्णय लेना कारगर होगा. यदि सेल क्वांटिटी ज्यादा है या बाय क्वांटिटी ज्यादा है तो बिड पर भरोसा नहीं करना चाहिए और स्क्रीन पर मौजूद नंबर्स के बारे में पड़ताल करना चाहिए. आपको बता दें सिर्फ टेक्निकल विश्लेषण ही किसी स्टॉक विशेष की सप्लाई और डिमांड के बारे में बाजिव पड़ताल प्रदान कर सकता है.
  9. न्यूज़ फ्लो- मार्केट के बाहर की खबरों से बचना चाहिए और ऐसी खबरों में आकर कभी भी ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए. क्योंकि स्टॉक्स की कीमत पल में चढ़ती और उतरती है.
  10. एवरेज आउट- जब स्टॉक की कीमत गिरना शुरू होती है कुछ लोग एवरेज से अधिक की खरीदी कर लेते हैं. अगर टिप्स की बात की जाए तो एक्सपर्ट्स ऐसा करने से हमें रोकते हैं. प्रोफेशनल ट्रेडर्स कभी भी एवरेज आउट नहीं होते, क्योंकि यह लूज़िंग ट्रेड होता है. सलाह के मुताबिक ऐसी परिस्थिति में सही समय तक के लिए हमें इंतजार करना चाहिए.

क्या आपको लगता है इन टिप्स के आधार पर आप तत्काल ट्रेडिंग करने के लिए तैयार हैं? आपका उत्तर है “ना”. तो आपको कुछ स्किल्स डेवलप करना होंगी, जिसमें आपको टेक्निकल विश्लेषण में भी विशेषज्ञता हासिल करना होगी. क्योंकि कहा भी गया है ट्रेडिंग एक सरल प्रक्रिया है, लेकिन आसान नहीं, पर आप आसानी से जान सकते हैं कि भविष्य में ट्रेडिंग के दौरानआप कैसे चार्ट्स और टेक्निकल विश्लेषण की मदद ले सकते है.

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